भारत रत्न पुरस्कार देने की शुरुआत की थी

जनवरी महीने का इतिहास : जनवरी का महीना शांत माना जाता है, शायद आपको पता ना हो कि प्राचीन कलैंडर में जनवरी महीना और फरवरी महीना शामिल ही नहीं था। रोमन कैलेंडर के अनुसार मार्च से लेकर दिसंबर तक केवल 10 महीने थे बाद में जनवरी महीने को जोड़ा गया 

भारत रत्न पुरस्कार:-भारत में आज ही के दिन 1954 को तत्कालीन राष्ट्रपति डॉ. राजेन्द्र प्रसाद ने भारत रत्न पुरस्कार देने की शुरुआत की थी। कला, साहित्य, विज्ञान, समाज सेवा और खेल जैसे विशिष्ट क्षेत्रों में असाधारण तथा उल्लेखनीय राष्ट्र सेवा करने वालों को देश का सर्वोच्च नागरिक सम्मान 'भारत रत्न' प्रदान किया जाता है।

वर्ष 1954 में प्रथम बार भारत रत्न पुरस्कार सी. राजगोपालाचारी, सर्वपल्ली राधाकृष्णन और सी.वी. रमन को दिया गया था। आरंभ में यह पुरस्कार केवल जीवित व्यक्तियों को ही दिए जाने का प्रावधान था परन्तु वर्ष 1955 में मरणोपरांत सम्मान देने का प्रावधान जोड़ा गया। वर्ष 2013 तक भारत रत्न पुरस्कार के लिए खेल को नहीं जोड़ा गया था परन्तु वर्ष 2013 में प्रथम बार स्पोर्ट्स सेक्टर से जुड़ी शख्सियत को भी भारत रत्न पुरस्कार देने का निर्णय किया गया और खेल जगत का प्रथम पुरस्कार क्रिकेटर सचिन तेंदुलकर को दिया गया।

शुरूआत में इस सम्मान के पदक का डिजाइन 35 मिलीमीटर का गोलाकार गोल्ड मेडल था, जिसमें सामने की ओर सूर्य बना हुआ था।  सूर्य के ऊपर हिंदी में भारत रत्न लिखा हुआ था तथा सूर्य के नीचे की ओर पुष्पहार अंकित था। बाद में मेडल के डिजाईन को बदल कर तांबे से बने पीपल के पत्ते के समान कर दिया गया। इस पत्ते पर प्लेटिनम का चमकता सूर्य बनाया गया जिस पर चांदी में 'भारत रत्न' लिखा रहता है।

इस पदक की संरचना पीपल के पत्ते के समान होती है। वर्तमान में यह प्लेटिनम धातु का बना होता है। यह लगभग 59 मिमी. लंबा, 48 मिमी. चौड़ा और 3.2 मिमी. मोटा है। एक तरफ, प्लेटिनम से बने उभरा हुआ सनबर्स्ट डिज़ाइन का व्यास 16 मिमी. का होता है।  जिसमें सूर्य के केंद्र से किरणें फैलती हैं और देवनागरी लिपि में आगे की ओर “भारत रत्न” लिखा होता है। वहीं दूसरी तरफ राष्ट्रीय प्रतीक बना होता है और साथ में “सत्यमेव जयते” लिखा होता है। पदक के साथ 2 इंच चौड़ा सफेद रिबन फीता जुड़ा होता है जिससे इसे गले में पहना जा सके।


1998 एम . एस . सुब्बुलक्ष्मी शास्त्रीय संगीत

1999 पं . रविशंकर सितार वादक

2001 लता मंगेशकर गायिका

2001 उस्ताद बिस्मिल्लाह खाँ शहनाई वादक

2009 प . भीमसेन जोशी गायक

2019 भूपेन हजारिका गायक / संगीत

1954 - डॉक्टर सर्वपल्ली राधाकृष्णन
1954 - चक्रवर्ती राजगोपालाचारी
1954 - डॉक्टर चन्‍द्रशेखर वेंकटरमण
1955 - डॉक्टर भगवान दास
1955 - सर डॉ. मोक्षगुंडम विश्वेश्वरय्या
1955 - पं. जवाहर लाल नेहरु
1957 - गोविंद वल्लभ पंत
1958 - डॉ. धोंडो केशव कर्वे
1961 - डॉ. बिधान चंद्र रॉय
1961 - पुरूषोत्तम दास टंडन
1962 - डॉ. राजेंद्र प्रसाद
1963 - डॉ. जाकिर हुसैन
1963 - डॉ. पांडुरंग वामन काणे
1966 - लाल बहादुर शास्त्री (मरणोपरान्त)
1971 - इंदिरा गांधी
1975 - वराहगिरी वेंकट गिरी
1976 - के. कामराज (मरणोपरान्त)
1980 - मदर टेरेसा
1983 - आचार्य विनोबा भावे (मरणोपरान्त)
1987 - खान अब्दुल गफ्फार खान
1988 - एम. जी. आर (मरणोपरान्त)
1990 - डॉ. भीमराव रामजी आंबेडकर (मरणोपरान्त)
1990 - नेल्सन मंडेला
1991 - राजीव गांधी (मरणोपरान्त)
1991 - सरदार वल्लभ भाई पटेल (मरणोपरान्त)
1991 - मोरारजी देसाई
1992 - मौलाना अबुल कलाम आज़ाद (मरणोपरान्त)
1992 - जे. आर. डी. टाटा
1992 - सत्यजीत रे
1997 - अब्दुल कलाम
1997 - गुलजारी लाल नंदा
1997 - अरुणा आसिफ अली (मरणोपरान्त)
1998 - सी सुब्रामण्यम
1998 - जयप्रकाश नारायण (मरणोपरान्त)
1999 - अमृत्य सेन
1999 - गोपीनाथ बोरदोलोई (मरणोपरान्त)
2014 - सी. एन. आर. राव
2014 - सचिन तेंदुलकर
2015 - अटल बिहारी वाजपेयी
2015 - महामना मदन मोहन मालवीय (मरणोपरान्त)
2019 - प्रणब मुखर्जी
2019 - भूपेन हजारिका (मरणोपरान्त)
2019 - नानाजी देशमुख (मरणोपरान्त)

अब तक विभिन्न क्षेत्रों की 48 हस्तियों को भारत रत्न सम्मान दिया जा चुका है। इस कड़ी में देश का पहला भारत रत्न का सम्मान दूसरे राष्ट्रपति डा. सर्वपल्ली राधाकृष्णन को वर्ष 1954 में प्रदान किया गया था। भारत रत्न सम्मान पाने वालों में लता मंगेशकर, पूर्व राट्रपति प्रणब मुखर्जी और भूपेन हजारिका के अलावा नानाजी देशमुख भी शामिल हैं।

 अब तक केवल एक ही उद्योगपति को भारत रत्न से नवाजा गया है। जहांगीर रतनजी दादाभाई टाटा यानी जेआरडी टाटा को 1992 में भारत रत्न से सम्मानित किया गया था। जेआरडी टाटा 53 साल तक टाटा सन्स के चेयरमैन रहे थे। इसमें कोई शक नहीं है कि जेआरडी टाटा इस ग्रुप के सबसे सफल चेयरमैन समझे जाते हैं। जेआरडी सिर्फ 34 वर्ष  की छोटी उम्र में टाटा सन्स के चेयरमैन का पद संभाला था और वह इस पद पर 1991 तक बने रहे।

ख़ान अब्दुल ग़फ़्फ़ार ख़ान भारत रत्न पाने वाले प्रथम गैर-भारतीय नागरिक थे। उन्हें वर्ष 1987 में भारत रत्न से सम्मानित किया गया था। उन्होंने भारत के स्वतंत्रता संग्राम में भाग लिया और अपने कार्य और निष्ठा के कारण "सरहदी गांधी" (सीमान्त गांधी), "बच्चा खाँ" तथा "बादशाह खान" के नाम से पुकारे जाने लगे।

 लाल बहादुर शास्त्री को वर्ष 1966 में उनकी सादगी, देशभक्ति और ईमानदारी के लिये मरणोपरान्त भारत का सर्वोच्च नागरिक पुरस्कार भारत रत्‍न से सम्मानित किया गया था। एम० जी० रामचंद्रन पूरा नाम मारुदुर गोपालन रामचन्द्रन को वर्ष 1988 में उनके मरणोपरांत भारत के सर्वोच्च नागरिक सम्मान भारत रत्न से सम्मानित किया गया था। वे वर्ष 1977 से लेकर 1987 तक मृत्युपर्यन्त भारत के तमिलनाडु राज्य के मुख्यमंत्री रहे।


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